1. परमेश्वर से बात करें
पहला कदम यह है कि समान्य रीति से परमेश्वर से बात करें, और यह स्वीकार करें कि आप ने उस से बलवा किया है तथा आप अब दण्ड के पात्र हैं, आप स्वयं अपने स्थान पर यीशु कि मृत्यु के आधार पर उससे क्षमा के लिए कहें। आपकी सहायता करने के लिए परमेश्वर से कहें और विद्रोही जीवन जीने के स्थान पर ऐसा व्यक्ति बनने में सहायता करें जो यीशु को शासक के रूप में उसके साथ जीवन जीने वाला व्यक्ति हो। आप कुछ इस तरह से प्रार्थना कर सकते है::
प्रिय परमेश्वर,
मुझे पता है कि मैं आपके द्वारा स्वीकार किए जाने के योग्य नहीं हूँ। मैं अनन्त जीवन के आपके उपहार के योग्य पात्र नहीं हूँ। मैं विद्रोह का दोषी हूँ और मैंने आपके विरूद्ध आपको अनदेखा किया है। मुझे खेद है, मुझे क्षमा और आपकी आवश्यक्ता है।
अपने बेटे को मेरे लिए मरने, भेजने के लिए धन्यवाद ताकि मुझे क्षमा क्षमा प्राप्त हो सके। धन्यवाद मुझे नया जीवन देने के लिए वह मृतको में से जी उठा।
कृपया मुझे क्षमा करें और मुझे बदल दें ताकि मैं जीवित रह सकूं, मेरे शासक यीशु के साथ। आमीन।
2. यीशु के अधीन हो जाएं
दूसरा कदम पहले कदम के बाद आता है। ऊपर जिस तरह की प्रार्थना है, आप भी प्रार्थना करने का अभ्यास करना चाहेंगे – अर्थात् वास्तव में यीशु आपके साथ शासक के रूप में रहता है।
आपके जीवन में कई तरह के क्षेत्र होंगे जिन्हें बदलने की आवश्यक्ता है। पुरानी विद्रोही आदतों को छोड़ना होगा (जैसे लोभ, क्रोध, स्वार्थ और इसी तरह) और परमेश्वर को सम्मान देने वाली कुछ नई आदतों को लेना होगा (उदारता, दया, प्रेम, और धैर्य के समान)।
यह दूसरा कदम आपके जीवन भर चलता रहेगा, परन्तु परमेश्वर हर तरह से आपके साथ रहेगा। उसके वचन बाइबल को पढ़ने के द्वारा वह आपसे बात करता रहेगा; जब आप उससे प्रार्थना करते हैं तो वह आपकी बात सुनता रहेगा; और आपकी सहायता करता रहेगा; बदलने के लिए और नए तरीके से जीने के लिए वह आप को अपनी आत्मा से सामर्थ देगा, जो आपके अन्दर रहता है; और आप उनके साथ निरन्तर मिलते रहें। वह अन्य मसीहीयों को भी आप को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान करेगा।
तो दूसरा कदम यीशु के आधीन होना और उसके साथ उसे अपने शासक के रूप में स्वीकार करके जीवन जीने के लिए आरम्भ करना है।
3. यीशु पर भरोसा रखें
तीसरा कदम भी जारी रखना है। आपको अपना भरोसा सही स्थान में बनाए रखने की आवश्यक्ता है।
यह केवल यीशु (और उनकी मृत्यु और पुनरूत्थान) के कारण है कि आपको क्षमा किया जा सकता है और परमेश्वर के साथ सही रखा जा सकता है।
उसके पास आपको बार -बार आना होगा, क्योंकि जैसे-जैसे आप परमेश्वर के नये तरीकों से जीवन जीना आरम्भ करते हैं, आप अभी भी असफल होंगे और गलती करेंगे। हम सब भी गलत करते हैं। हम सभी को अपनी क्षमा के लिए एकमात्र आधार के रूप में क्रूस पर यीशु की मृत्यु को देखते रहना चाहिए।
हमें कभी भी उस पर – और केवल उसी पर- भरोसा करना बन्द नहीं करना चाहिए- जैसे कि वह साधन जिसके द्वारा हमें क्षमा किया जाता है और अनन्त जीवन दिया जाता है।
यदि आप ये कदम उठाते हैं, तो आप निश्चिंत हो सकते हैं कि वास्तव में परमेश्वर ने आपको क्षमा कर दिया और आपको एक नया जीवन दिया है।
यदि आपने अभी तक परमेश्वर को इस तरह से प्रतिउत्तर नहीं दिया है, तो आप समान्य रीति से आश्वस्त रहें कि आप उसके न्याय दण्ड के अधीन हैं।
सड़क में एक कांटा है। जीने के दो ही तरीके हैं। यह वह मार्ग है जिसका हम सभी सामना करते हैं।